जस्टिस से जस्टिस को तरसती जनता , दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से पैसा मिलने की हवा आग की तरह फैल गई – डिजायर न्यूज़

जस्टिस से जस्टिस को तरसती जनता , दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से पैसा मिलने की हवा आग की तरह फैल गई – डिजायर न्यूज़

डिजायर न्यूज़ नई दिल्ली – कुछ समय से जुडीसरी पर लगातार इलज़ाम लगते नजर आ रहे है और जनता में एक आक्रोश है क्यों की जनता की आखिर उम्मीद न्यायपालिका है और अगर उसपर गंभीर आरोप लगते है तो कही ना कही विश्वास डगमगा जाता है। आज संसद में भी दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर नकदी मिलने से सोशल मीडिया पर आई बाढ़ को लेकर कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया। साथ ही साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा का निर्णय भी लोगो में रोष का कारण बन रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से जवाब माँगा है।

जस्टिस यशवंत वर्मा - डिजायर न्यूज़
जस्टिस यशवंत वर्मा – डिजायर न्यूज़

दिल्ली हाई कोर्ट के 56 वर्षीय जस्टिस यशवंत वर्मा ने 1992 में अधिवक्ता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया था. उन्हें 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया था और 1 फरवरी 2016 को स्थायी जज के रूप में शपथ दिलाई गई थी. उनका जन्म 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की. सुप्रीम कोर्ट ने अब उनका तबादला वापस इलाहबाद हाई कोर्ट में वापस कर दिया है , दिल्ली में वो नंबर दो की पोजीशन पर थे अब वहां दोबारा से नंबर 9 की पोजीशन पर चले गए है।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर आग और कैश मिलने के मामले में शुक्रवार शाम नया मोड़ आ गया। दिल्ली फायर ब्रिगेड चीफ अतुल गर्ग का कहना है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के घर आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड की टीम को कोई नकदी नहीं मिली।

गर्ग के मुताबिक 14 मार्च की रात 11.35 बजे लुटियंस दिल्ली में बने जज के बंगले पर आग लगने की खबर मिली। टीम जब वहां पहुंची तो आग स्टोर रूम में लगी थी, जिसे बुझाने में 15 मिनट लगे। इसके तुरंत बाद हमने पुलिस को खबर दी। टीम को वहां कोई नकदी नहीं मिली थी। अगर नकदी नहीं मिली तो फेर सवाल उठता है कि फिर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से किसी चीज़ की रिपोर्ट मांगी है ?

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से पैसा मिलने की हवा आग की तरह फैल गई - डिजायर न्यूज़
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से पैसा मिलने की हवा आग की तरह फैल गई – डिजायर न्यूज़

इससे ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर बयान जारी किया। जिसमें कहा गया कि कैश मिलने की गलत सूचनाएं और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आज CJI संजीव खन्ना को प्राइमरी रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

पूरे घटनाक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने बयान में साफ किया कि जज के बंगले से कैश मिलने की खबर और उनके तबादले का आपस में कोई संबंध नहीं है।

दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले पर आग लगी थी। आग बुझाने गई फायर ब्रिगेड की टीम को कैश मिला था।

इधर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अब जस्टिस वर्मा के वापस इलाहाबाद ट्रांसफर का विरोध कर रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि कॉलेजियम के फैसले से ये सवाल उठ रहा है कि क्या हम कूड़ादान हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा का निर्णय-Dzire News
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा का निर्णय-Dzire News

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा का निर्णय

हाल ही में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने एक ऐसे मामले में निर्णय दिया जिसमें दो पुरुषों, पवन और आकाश, पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप था। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि आरोपियों द्वारा लड़की के कपड़े फाडने और उसके शरीर को पकड़ने की घटनाएँ बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अंतर्गत नहीं आतीं, बल्कि यह IPC की धारा 354-B (नग्न करने का इरादा) और POCSO अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आती हैं।

निर्णय के मुख्य बिंदु
अपराध की प्रकृति: न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य यह नहीं दर्शाते कि आरोपियों का बलात्कार करने का इरादा था। उन्होंने कहा कि यह साबित करना आवश्यक है कि अपराध की तैयारी से आगे बढ़कर वास्तविक प्रयास हुआ है। बलात्कार नहीं: न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जबकि आरोपियों ने लड़की को खींचने और उसके कपड़े तोड़ने की कोशिश की, ये कृत्य बलात्कार के प्रयास के रूप में नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा कि कोई साक्ष्य नहीं है जो यह दर्शाता हो कि पीड़िता को निर्वस्त्र किया गया या बलात्कार करने का स्पष्ट इरादा था। आरोपों में संशोधन: इसके परिणामस्वरूप, उच्च न्यायालय ने आरोपों को बलात्कार से घटाकर कम गंभीर आरोपों में बदलने का आदेश दिया।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया
इस निर्णय ने महिलाओं के अधिकारों के अधिवक्ताओं और राजनीतिक नेताओं के बीच भारी आक्रोश पैदा किया है। महिला और बाल विकास मंत्री, अन्नपूर्णा देवी ने इस निर्णय को “गलत” बताते हुए कहा कि इससे समाज में महिलाओं की सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।

निहितार्थ
यह निर्णय यौन अपराधों, विशेष रूप से नाबालिगों के खिलाफ, न्यायिक मानकों पर सवाल उठाता है। कानूनी विशेषज्ञ और कार्यकर्ता इस बात पर चिंतित हैं कि यह कमजोर व्यक्तियों के लिए सुरक्षा को कमजोर कर सकता है और भविष्य में समान मामलों में कैसे निपटा जाएगा, इस पर एक खतरनाक मिसाल स्थापित कर सकता है।

इस आर्टिकल में इस्तेमाल की गई पिक्चर का श्र्ये गूगल को जाता है। सभी जानकारी डिजायर न्यूज़ के सूत्रों के हवाले से है .

संजीव शर्मा
एडिटर इन चीफ

 

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